एक निर्धारित लक्ष्य और कभी ना बुझने वाले जोश के साथ अपने मिशन पे काम करने वाला शरीर ही इतिहास के पाठ्यक्रम को बदलता है प्रार्थना का अर्थ कुछ माँगना नहीं है, ये तो आत्मा की एक लालसा है, ये हमारी कमजोरी की स्वीकारोक्ति है। प्रार्थना में बिना शब्दों के भी ह्रदय और मन का उपस्थित होना, शब्दों के साथ भी मन के ना होने से बेहतर है -महात्मा गाँधी
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